रतलाम,10 अक्टूबर(खबरबाबा.काम)। आनलाइन मोबाइल गेम्स की जद में आकर किशोर मन किस हद तक गलत कदम उठा सकते हैं ,इसका उदाहरण गुरुवार को देखने को मिला। झालावाड में रहने वाला एक 14 वर्षीय बालक आनलाइन मोबाइल गेम खेलते हुए टास्क पूरा करने और चैटिंग के चक्कर में घर वालों को बिना बताए ट्रेन में बैठकर बुधवार रात मुंबई जाने के लिए निकल पड़ा। घबराए परिजनों ने झालावाड़, कोटा से लेकर रतलाम तक सभी मुंबई जाने वाली ट्रेनों में पड़ताल शुरु की।

इस बीच उन्होंने अपने परीचित रतलाम निवासी प्रभु राठौड़ से मदद मांगी, जिन्होंने रतलाम प्रेस क्लब सचिव एम. पी गोस्वामी को रात 1.30 बजे घटनाक्रम बताया। श्री गोस्वामी ने रात में बच्चे के फोटो सहित रतलाम आरपीएफ, डीआरएम को ट्वीट किया। रतलाम डीआरएम ने संज्ञान लिया और ट्वीट करने के चंद मिनटों में ही डीआरएम कोटा, आरपीएफ पश्चिम रेलवे बीआरसी, आरपीएफ एसआर डीएससी जयपुर, आरपीएफ पोस्ट अजमेर, आरपीएफ बीआरसी मुंबई आदि ने संज्ञान लेते हुए अपने-अपने स्टेशनों पर मुंबई जाने वाली ट्रेनों में सर्चिंग भी शुरु कर दी। रेलवे अधिकारियों ने इतनी संवेदना और तत्परता दिखाई कि लगातार बालक के परिजनों से फोन पर चर्चा करने के साथ ही एक दूसरे से ट्रेनों और उसे ढूंढने की कार्रवाई की अपडेट डालते रहे।
ऐसी लगी परिजनों को मुंबई जाने की सूचना…
बुधवार शाम बालक गायब हुआ तो परिजन ढूंढते हुए कोचिंग पहुंचे। यहां कुछ दोस्तों ने बताया कि बालक आनलाइन मोबाइल गेम खेलता था, जिसमें मुबंई जाने को लेकर उसकी कुछ बात हुई थी। कुछ परीचितों ने बताया बालक झालावाड़ से लोकल ट्रेन से कोटा तक गया है। कोटा से वह मुंबई जाने के लिए ट्रेन में बैठा होगा। इसी अनुमान से परिजनों ने उस समय मुंबई के लिए रवाना होने वाली डीलक्स एक्सप्रेस और जनता एक्सप्रेस में चढकर उसे ढूंढना शुरु कर दिया।

आरपीएफ और परिजनों को नागदा में मिला….
रात 1 बजे से परिजन भी बालक को ट्रेन में ढूंढते रहे और रेलवे अधिकारी भी। ट्वीटर पर जानकारी मिलते ही आरपीएफ ने वडोदरा, कोटा, मुंबई मंडल के स्टेशनों पर भी सर्चिंंग के साथ रतलाम मंडल के गोधरा, सहित सभी छोटे-बड़े स्टेशनों पर आने वाली ट्रेनों में जांच शुरु कर दी। सुबह करीब 5 बजे रतलाम मंडल के नागदा स्टेशन पर बालक आरपीएफ और उसके रिश्तेदारों को मिल गया। आरपीएफ की मदद से रिश्तेदारों ने उसे ट्रेन से उतारा और फिर माता पिता को भी सूचना दी गई। बाद में परिजन बच्चे को लेकर झालावाड़ के लिए निकल गए।
आर्मी में है पिता, आनलाइन गेम से बेटे पड़ा लत में….
बालक के पिता आर्मी में सेवारत है, जबकि मां गृहणी है। परिजनों ने बताया कि बालक कुछ समय से मोबाइल में आनलाइन गेम खेल रहा था। इस गेम में भी टास्क दिए जाते हैं और गेम खेलने वालों का ग्रुप बन जाता है जिसमें वे चैटिंग भी कर सकते हैं। इसी गेम में मुंबई के लड़कों के संपर्क में आकर बालक घर पर बिना बताए घर से निकल गया था। तत्काल परिजनों की पड़ताल और रेलवे अधिकारियों की संदेवनशीलता के चलते वह परिजनों को मिल गया।
बच्चों पर दे ध्यान, शासन भी बैन करें ऐसे गेम….
बाल मनोविज्ञान विशेषज्ञ सुनील शर्मा बताते हैं कि बच्चों और विशेषकर 11 से 16 वर्ष की उम्र के किशोर ऐसे गेम और टास्क के फेर में जल्दी पड़ रहे हैं। उनके अनुसार इन गेम को इस तरीके से बनाया गया है कि यह बालकों के मन को एक तरह से काबू कर लेते हैं। इनकी लत में आगे बढने के फेर में बच्चे यह समझ भी भूल जाते है कि जो वे कर रहे हैं, उसका परिणाम उनके लिए क्या होगा। ऐसे में माता पिता अपने बच्चों को अकेले में मोबाइल देने में सावधानी रखें। प्ले स्टोर के फीचर में ऐसे गेम्स की डाउनलोडिंग को बंद किया जा सकता है। इसके अलावा उन्होंने शासन और सरकार से भी ऐसे मोबाइल गेम्स बैन करने की अपील की है।
इनका कहना है
हमें ट्वीट के जरिये बालक के ट्रेन से मुंबई जाने की सूचना मिली थी और वैसे ही न केवल रतलाम मंडल बल्कि वडोदरा, कोटा, मुबंई मंडलों और आरपीएफ भी स्वत: तत्काल कार्रवाई प्रारंभ की। सभी के सहयोग और सामूहिक मदद से बालक मिल गया है जो राहत की बात है।
–आरएन सुनकर, डीआरएम, रतलाम रेल मंडल
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आनलाइन मोबाइल गेम के टास्क में बिना बताए घर से निकलकर मुंबई जाने वाली ट्रेन में बैठा नाबालिग बालक,ट्वीट पर मांगी मदद तो रतलाम, वडोदरा, मुंबई, कोटा मंडल ने तत्काल लिया एक्शन, नागदा में परिजन और आरपीएफ को बालक ट्रेन से मिला
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