नई दिल्ली, 25 नवम्बर2019/ महाराष्ट्र की राजनीतिक लड़ाई अभी भी थमी नहीं है. सोमवार को सर्वोच्च अदालत में कांग्रेस, एनसीपी और शिवसेना की तरफ से दाखिल याचिका पर सुनवाई हुई, जिसमें विधानसभा में फ्लोर टेस्ट की मांग की गई थी. हालांकि, अदालत की तरफ से अब मंगलवार को फैसला सुनाया जाएगा.
सोमवार को अदालत में तीखी बहस हुई और बीजेपी-एनसीपी की ओर से पेश वकीलों ने फ्लोर टेस्ट में जल्दबाजी ना करने को कहा गया. वहीं पहली बार ये बात भी सामने आई है कि राज्यपाल की ओर से बहुमत साबित करने के लिए 14 दिन का समय दिया गया था. इससे पहले राजनीतिक गलियारों में चर्चा थी कि फ्लोर टेस्ट 30 नवंबर को होना है.
ना हो कोई जल्दबाजी, परंपरा का पालन हो: मुकुल रोहतगी
देवेंद्र फडणवीस की ओर से पक्ष रख रहे मुकुल रोहतगी ने अदालत से अपील की है कि फ्लोर टेस्ट के लिए विधानसभा की प्रक्रिया का पालन होना चाहिए. उन्होंने मांग की है कि पहले प्रोटेम स्पीकर चुना जाए, फिर विधायकों की शपथ, उसके बाद स्पीकर का चुनाव, राज्यपाल का अभिभाषण और अंत में फ्लोर टेस्ट होना चाहिए.
इसी के साथ मुकुल रोहतगी ने अदालत को ये भी बताया कि राज्यपाल की ओर से देवेंद्र फडणवीस को बहुमत साबित करने के लिए 14 दिन का समय दिया गया था. बता दें कि अभी तक ये चर्चा चल रही थी कि 30 नवंबर को फ्लोर टेस्ट हो सकता है लेकिन अब ये बात पहली बार सामने आई थी
बता दें कि देवेंद्र फडणवीस ने 23 नवंबर की सुबह शपथ ली थी, ऐसे में शपथ के बाद से 14 दिनों में उन्हें बहुमत साबित करने को कहा गया. यानी इस हिसाब से देवेंद्र फडणवीस के सामने 7 दिसंबर तक फ्लोर टेस्ट साबित करने की चुनौती थी.
कांग्रेस-एनसीपी की मांग- जल्द से जल्द हो फ्लोर टेस्ट
कांग्रेस-एनसीपी-शिवसेना की तरफ से अदालत में कपिल सिब्बल, अभिषेक मनु सिंघवी ने पक्ष रखा. अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि ऐसे कई मामलों में सुप्रीम कोर्ट ने 24 घंटे या 48 घंटे में बहुमत साबित करने को कहा था, ऐसे में इस मामले में भी ऐसा ही होना चाहिए. सिंघवी की ओर से कहा गया कि फ्लोर टेस्ट पर सब साबित हो जाएगा.
अभिषेक मनु सिंघवी ने दलील दी कि अगर दोनों पक्ष फ्लोर टेस्ट को तैयार हैं तो फिर देरी क्यों हो रही है. उन्होंने अदालत में 154 विधायकों के समर्थन पत्र भी सौंपा लेकिन अदालत ने कहा कि ऐसे में उन्हें विधायकों से भी जवाब लेना पड़ेगा, जिसके बाद पत्र वापस ले लिया गया. कांग्रेस-एनसीपी की ओर से लगातार मांग की गई है कि अदालत को तुरंत प्रोटेम स्पीकर की नियुक्ति का आदेश देना चाहिए, जिसके बाद विधायक शपथ लें और फिर फ्लोर टेस्ट हो सके.
गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट अब इस मामले में मंगलवार को फैसला सुनाएगा. एक तरफ से मामला अदालत में चल रहा है तो दूसरी ओर राजनीतिक दल लगातार बहुमत होने का दावा कर रहे हैं, बीजेपी का दावा है कि उनके पास 160 से अधिक विधायकों का समर्थन है.
(साभार-आज तक)
Related Posts
Add A Comment
Subscribe to Updates
Get the latest creative news from FooBar about art, design and business.
© 2026 ThemeSphere. Designed by ThemeSphere.