नई दिल्ली, 30जनवरी2020/देश का आम बजट शनिवार यानी 1 फरवरी को पेश होने वाला है. हर साल की तरह इस बार भी बजट से ठीक एक दिन पहले यानी 31 जनवरी को आर्थिक सर्वे पेश किया जाएगा.
इस आर्थिक सर्वे को वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण सदन के पटल पर रखेंगी. बीते कुछ महीनों में देश के आर्थिक हालात को देखते हुए ये सर्वे काफी अहम माना जा रहा है. ऐसे में लोगों के दिमाग में ये सवाल उठता है कि आर्थिक सर्वे क्या है और बजट से एक दिन पहले ही इसे क्यों पेश किया जाता है.. आइए जानते हैं इस रिपोर्ट में..
क्या होता है आर्थिक सर्वे?
आर्थिक सर्वे देश के आर्थिक विकास का सालाना लेखाजोखा होता है. इस सर्वे रिपोर्ट से आधिकारिक तौर पता चलता है कि बीते साल आर्थिक मोर्चे पर देश का क्या हाल रहा. इसके अलावा सर्वे से ये भी जानकारी मिलती है कि आने वाले समय के लिए अर्थव्यवस्था में किस तरह की संभावनाएं मौजूद हैं.आसान भाषा में समझें तो वित्त मंत्रालय की इस रिपोर्ट में भारतीय अर्थव्यवस्था की पूरी तस्वीर देखी जा सकती है. अकसर, आर्थिक सर्वे के जरिए सरकार को अहम सुझाव दिए जाते हैं. हालांकि, इसकी सिफारिशें सरकार लागू करे, यह अनिवार्य नहीं होता है.
आर्थिक सर्वे को वित्त मंत्रालय में मुख्य आर्थिक सलाहकार और उनकी टीम तैयार करती है. इस बार मुख्य आर्थिक सलाहकर कृष्णमूर्ति सुब्रमण्यम हैं. ऐसे में जाहिर सी बात है कि कृष्णमूर्ति सुब्रमण्यम की अगुवाई में आर्थिक सर्वे रिपोर्ट तैयार की गई है. वित्त मंत्रालय के इस अहम दस्तावेज को सदन में वित्तमंत्री द्वारा पेश किया जाता है.
इस बार आर्थिक सर्वे को वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण पेश करेंगी. बीते साल 4 जुलाई को निर्मला सीतारमण ने अपना पहला आर्थिक सर्वे पेश किया था. इसके बाद 5 जुलाई को मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल का पहला आम बजट पेश किया गया. यहां बता दें कि देश में पहली बार आर्थिक सर्वे 1950-51 में जारी किया गया था और वित्त मंत्रालय की वेबसाइट पर 1957-58 से आगे के दस्तावेज भी मौजूद हैं.
(साभार-आज तक)
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