रतलाम,14 जनवरी(खबरबाबा.काम)। जिले में कहीं भी सरकारी पट्टे का अंतरण या रजिस्ट्री कलेक्टर की जानकारी के बिना नहीं होगी। कलेक्टर ने रजिस्ट्रार को निर्देश जारी किए हैं कि जिले में कहीं भी जिला प्रशासन की अनुमति के बिना रजिस्ट्री नहीं की जाए। एसी भूमियां जो संबंधित व्यक्ति, संस्था को राज्य सरकार या कलेक्टर द्वारा पट्टेदार के रूप में प्रदाय की गई हैं, चारे वह भूमिस्वामी के रूप में हो, अतंरण बगैर कलेक्टर की अनुमति के नहीं किया जाएगा।
कलेक्टर तन्वी सुंद्रियाल ने निर्देश जारी करते हुए बताया है कि रतलाम जिले में परीक्षण के दौरान सामने आया है कि विशेष प्रयोजन के लिए सरकारी पट्टों पर दी गई कई भूमि का विक्रय कर दिया गया है। एडीएम डॉ. कैलाश बुंदेला ने बताया कि कई मामलों में जिला प्रशासन को जानकारी दिए बगैर ही विक्रय कर दिया गया है। एसी सभी भूमिका के सबंध में प्रशासन द्वारा जानकारी भी एकत्रित कराई जा रही है। जांच में यह बात भी सामने आई है कि कई बार जितनी जमीन है उससे ज्यादा जमीन बेच दी गई और कई स्थानों पर अन्य गड़बड़ी भी मिली है। इन मामलों में भी अलग से जांच करवाई जा सकती है।
ये हैं पट्टेदार
–राज्य सरकार से मिली भूमि धारण करने का अधिकार कलेक्टर या राज्य द्वारा दिया गया था। भूमि मध्य भारत भू आगम एवं कृषकाधिकारी विधान संवत 2007 में यथापरीभाषित साधारण कृषक के रूप में धारण करने वाला।
-विंध्य प्रदेश में कोई विंध्य प्रदेश लैंड रेवेन्य एंड टेनेंसी एक्ट 1953 में विशेष कृषक के रूप में कोई निकुंज या तालाब या एसी भूमि जो सार्वजनिक प्रयोजनों
के लिए अर्जित कर ली गई है, गैर हकदार कृषक के रूप में धारण करता है।
–सिंरोज क्षेत्र में कोई भूमि राज्य सरकार से राजस्थान टेनेंसी एक्ट 1953 में यथापरीभाषित गैर खातेदार कृषक के रूप में धारन करता है।
–मप्र भू राजस्व संहिता 1959 की धारा 165(7) (ख) के अनुरूप कोई भी व्यक्ति जो राज्य सरकार से भूमि धारण करता है, कोई ऐसा व्यक्ति जो धारा 158 की उपधारा 3 के अधीन भूमिस्वामी अधिकार में भूमि धारण करता है अथवा जिसे भूमि सरकारी पट्टेदार के रूप में दखल में रखने का अधिकारी राज्य सरकार या कलेक्टर द्वारा दिया जाता है।
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