रतलाम, 14सितम्बर(खबरबाबा.काम)। पर्युषण महापर्व के तहत आठ दिनों तक तप आराधना के बाद शुक्रवार को क्षमापना पर्व मनाया गया। इस मौके पर लोगों ने सालभर में जाने-अनजाने में हुई गलतियों के लिए मिच्छामी दुक्कड़म बोलकर एक दूसरे से क्षमा मांगी।
गुरुवार को संवत्सरी का प्रतिक्रमण कर जैन धर्मावलंबियों द्वारा सभी जीवो से मिच्छामी दुक्कड़म किया गया ।शुक्रवार को क्षमापना पर्व मनाया गया । सुबह जिनालयों में दर्शन के पश्चात जैन धर्मावलंबी अपने परिजनों ,मित्रों, परिचितों के घर गए और उनसे मिच्छामी दुक्कड़ कह कर क्षमा मांगी।कई लोगों ने WhatsApp और Facebook के माध्यम से मैसेज भेजकर क्षमा मांगी। रतलाम में नेताओं ने भी एक दूसरे को मिच्छामी दुक्कड़म कहकर जाने अनजाने में गलती के लिए क्षमा मांगी।




क्षमा और मैत्री का संदेश देता पर्व : मिच्छामी दुक्कड़म
धर्म साधना की प्रक्रिया में क्षमा का महत्व स्थापन भगवान महावीर की एक महान देन है। उन्होंने सूत्र दिया, सब जीव मुझे क्षमा करें। मैं, सबको क्षमा करता हूं। मेरी सर्व जीवों से मैत्री है। किसी से बैर नहीं। यह सूत्र ध्वनित करता है कि क्षमा स्वयं अपने में ही साध्य नहीं है। उसका साध्य है मैत्री और मैत्री का साध्य है समता और निर्वाण। क्षमा और मैत्री मात्र सामाजिक गुण नहीं हैं, वे साधना की ही एक प्रक्रिया को रूपायित करते हैं, जिसका प्रारंभ ग्रन्थि विमोचन होता है तथा अन्त में मुक्ति। क्रोध चार कसायों में एक है। वह वैराणुबद्ध करता है। क्रोध के पीछे मान खड़ा है, लोभ खड़ा है, माया भी खड़ी है,…
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