रतलाम(खबरबाबा.काम)। किसान आंदोलन के दौरान डेलनपुर में हुए उपद्रव के ईनामी आरोपी नामली नगर परिषद के पूर्व अध्यक्ष राजेश भरावा को पुलिस द्वारा दर्ज दो अन्य प्रकरणों में भी अग्रिम जमानत मिल गई है। मुख्य प्रकरण में पिछले महीनें में अग्रिम जमानत पर छोडने के आदेश हो चुके है। डेलनपुर कांड के भरावा एक मात्र ऐसे आरोपी है, जिन्हें सभी प्रकरणों में अग्रिम जमानत पर छोडा जाएगा।
जिला एवं सत्र न्यायाधीश मृत्यंजय सिंह ने गुरूवार शाम औद्योगिक क्षेत्र थाने पर दर्ज अपराध क्रंमाक 323 व 324 में आरोपी को गिरफ्तारी की दशा में पचास-पचास हजार रूपए की जमानत एवं इतनी ही राशि का बंध पत्र प्रस्तुत करने के आदेश दिये है। उनके न्यायालय में अभिभाषक अमीन खान ने भरावा की ओर से धारा 438 के तहत अग्रिम जमानत के आवेदन प्रस्तुत किये थे। उपरोक्त दोनो प्रकरण शासकीय कार्य में बाधा, शासकीय सेवकों को चोट पहुंचाने, वाहनों को जलाने और बलवा करने के है। इनके अलावा एक अन्य मुख्य प्रकरण जानलेवा हमले, शासकीय कार्य में बाधा और बलवे का अपराध क्रंमाक 322 के रूप में दर्ज है, जिसमें जिला न्यायाधीश ने 22 जुलाई को ही भरावा की अग्रिम जमानत याचिका मंजूर कर ली थी। गुरूवार को हुए अग्रिम जमानत आदेश से पूर्व पुलिस ने भरावा को जमानत देने का विरोध किया। अभियोजन का कहना था कि, आरोपी की प्रकरण में मुख्य भूमिका है। पुलिस बल पर पथराव, वाहनों में आग लगाने और शासकीय संपत्ति को नुकसान पहुंचाने का कार्य करने के अलावा उसका आपराधीक रिकार्ड भी है। न्यायालय ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद पाया की आरोपी पर स्पष्ट आरोप ना लगाकर अन्य के साथ लगाये गये है। आरोपी द्वारा सीधा कार्य करना प्रतीत नहीं होता है। प्रकरण में आरोपी की पैरवी अभिभाषक शादाब खान, रजनीश शर्मा ने भी की।
जिला पंचायत उपाध्यक्ष सहित 250 है आरोपी
डेलनपुर में 4 जून को किसान आंदोलन के दौरान हिंसक प्रदर्शन में एक पुलिसकर्मी की आंख फूट गई थी, जबकि कई वाहन जला दिये गए थे। पुलिस ने इस प्रदर्शन को लेकर तीन प्रकरण दर्ज किए है जिनमें 57 नामजद लोगों सहित 250 आरोपी है। इनमें से तीन आरोपियों जिला पंचायत उपाध्यक्ष डीपी धाकड, पूर्व नगर परिषद अध्यक्ष राजेश भरावा, किसान नेता भगवती पाटीदार की गिरफ्तारी पर 20-20 हजार रूपए के इनाम घोषित किये गये थे। पुलिस इनमें से किसी को गिरफ्तार नहीं कर सकी। भरावा को तीनों प्रकरणों में अग्रिम जमानत मिल गई है, जबकि धाकड और पाटीदार न्यायालय में आत्मसमर्पण के बाद जेल में है।
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