रतलाम,30मार्च(खबरबाबा.काम)। एआईसीसी के सदस्य और जिला पंचायत उपाध्यक्ष दुर्गाप्रसाद उर्फ डीपी धाकड़ और भाई जयप्रकाश उर्फ प्रकाश निवासी अंबोदिया को धोखाधड़ी के मामले में न्यायालय ने दस-दस वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। धोखाधड़ी से जुड़े इस मामले की शिकायत महापौर डॉ. सुनीता यार्दे के परिजन ने करीब नौ वर्ष पूर्व थाना औद्योगिक क्षेत्र में दर्ज कराई थी। जिस पर शनिवार को फैसला आया।

अभियोजन के अनुसार ये फैसला तृतीय अपर सत्र न्यायाधीश विवेक कुमार श्रीवास्तव ने सुनाया। इसमें आरोपियों पर दोषसिद्ध होने पर डीपी धाकड़ और भाई जयप्रकाश को न्यायालय ने आईपीसी की धारा 420 में 7-7 वर्ष सश्रम कारावास और 1-1 हजार रुपए जुर्माना, धारा 467 में 10-10 वर्ष सश्रम कारावास और 10-10 हजार रुपए जुर्माना, धारा 467 में 7-7 वर्ष सश्रम और 10-10हजार रुपए जुर्माना और धारा 471 में 10-10 वर्ष सश्रम कारावास और 10-10 हजार रुपए जुर्माने की सजा सुनाई है। जुर्माना अदा न करने पर आरोपियों को अतिरिक्त कारावास भी भुगतना होगा।
ये था मामला
मामले की शिकायत करने वाले डॉ.मधुकर यार्दे,रतलाम महापौर डॉ सुनीता योर्दे के ससुर है। अतिरिक्त जिला जज विवेक कुमार श्रीवास्तव के न्यायालय में पारित आदेश के अनुसार,जिला पंचायत उपाध्यक्ष दुर्गाप्रसाद धाकड वर्ष २०१० में डॉ.मधुकर यार्दे के क्लिनीक में काम करता था। उसी दौरान उसने डॉ,मधुकर यार्दे की मालिकीयत का एक ट्रैक्टर किराये से चलाने के लिए लिया था। किराये से लिए गए इस ट्रैक्टर को डीपी धाकड व उसके भाई जयप्रकाश धाकड ने लेबड नयागांव फोरलेन कंपनी को डॉ.मधुकर यार्दे के फर्जी हस्ताक्षर करके बेच दिया था। कांग्रेस नेता डीपी धाकड ने डॉ.यार्दे से किराये पर लिए ट्रैक्टर का किराया लंबे समय तक अदा नहीं किया। किराया अदा नहीं करने पर डॉ.मधुकर यार्दे ने अपने लडके अजय को डीपी धाकड से बात करने भेजा। जब अजय ने पता किया तो उसे मालूम चला कि डीपी धाकड और उसके भाई ने डॉ.मधुकर यार्दे के फर्जी हस्ताक्षरों से अपने पक्ष में एक फर्जी बेचान नामा तैयार किया और इस बेचाननामें के आधार पर उक्त ट्रेक्टर फोरलेन कपंनी में किराये से लगा दिया। आरोपियों ने फोरलेन कंपनी से ट्रैक्टर के किराये के रुप में दो लाख सैतीस हजार रु.भी प्राप्त कर लिए।
बाद में डॉ.मधुकर यार्दे ने इस धोखाधडी की शिकायत पुलिस को की और पुलिस ने जांच के बाद दोनो आरोपियों के विरुध्द न्यायालय में चालान पेश किया। विद्वान न्यायाधीश श्री विवेक कुमार श्रीवास्तव ने मामले की सुनवाई के बाद दुर्गाप्रसाद धाकड व उसके भाई जयप्रकाश को धोखाधडी और कूटरचित दस्तावेज तैयार करने के मामले में दोषसिध्द करार दिया। न्यायाधीश ने धोखाधडी की धारा 420 भादवि में 7-7 वर्ष कठोर कारावास व एक एक हजार रु.जुर्माना,कूटरचित दस्तावेज के लिए धारा 467 भादवि में 10-10 वर्ष कठोर कारावास व दस-दस हजार रु.जुर्माना,इसी प्रकार धारा 468 में सात-सात वर्ष कारावास व एक-एक हजार जुर्माना और धारा 471 में दस-दस वर्ष कारावास व दस दस हजार रु.जुर्माने की सजा सुनाई। न्यायाधीश द्वारा सजा सुनाए जाने के बाद जिला पंचायत उपाध्यक्ष डीपी धाकड और उसके भाई जयप्रकाश को जेल भेज दिया गया है।
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