रतलाम,19जुलाई। रतलाम में अब भी 22 हजार 317 मेट्रिक टन रासायनिक अपशिष्ट मौजूद है जिससे जल, वायु, कृषि भूमि सभी प्रभावित हो रहे हैं। यह पूरा कचरा रतलाम की सज्जन केमिकल्स और जेवीएल का है जिनपर रासायनिक अपशिष्ट का निपटान नहीं करने पर एफआईआर दायर हुई है।
यह बात मध्यप्रदेश के लोक निर्माण मंत्री सज्जनसिंह वर्मा ने सैलाना विधायक हर्षविजय गेहलोत ‘गुड्डू’ द्वारा पूछे गए सवाल के जवाब में कही। श्री गेहलोत ने रतलाम में 20 सालों से व्याप्त रासायनिक कचरा की समस्या को लेकर अहम सवाल विधानसभा में उठाया। उन्होंने लोनि मंत्री से पूछा कि रतलाम में 20 सालों से पड़ी फैक्ट्रियों का 30 हजार टन जहरीला कचरा आज तक क्यों नहीं उठाया गया। इस लापरवाही के लिए कौन जिम्मेदार है। जल, कृषि ,मानव स्वास्थ, पशुधन, वायुमंडल, कृषि भूमि में इस कचरे के कारण क्या हानि हुई है। 20 साल में अध्य्यन कब कब इसके प्रभाव का अध्य्यन किया गया। उन्होंने यह भी पूछा कि जहरीले कचरे को छोड़ने के जिम्मेदार उद्योगों के मालिक पर क्या कार्रवाई हुई है। कचरा के निष्पादन के भूमिगत स्त्रोत ठीक करने, कृषि भूमि ठीक करने में क्या उनसे कोई वसूली हुई है। कचरे में कौन-कौन से रसायन है और बरसात में यह रसयान घुलने से क्या क्या नुकसान होते हैं। जहरीला कचरा कब तक उठेगा और भूगर्भ स्त्रोत कब तक ठीक होंगे।
उद्योगो पर हुई है एफआईआर , कचरा निष्पादन के लिए बन रही डीपीआर
इसके जवाब में मंत्री श्री वर्मा ने बताया कि रतलाम में वर्तमान में करीब बाइस हजार तीन सौ सत्राह मैट्रिक टन कचरा पड़ा हुआ है। यह कचरा परिसंकटमय अपशिष्ट है न की जहरीला कचरा। जिले के डोसीगांव में सज्जन केमिकल्स का करीब 22316.6 मैट्रिक टन और जेवीएल का करीब 0.4 मैट्रिक टन कचरा पड़ा है। सज्जन केमिकल्स के आधिपत्या के प्लांट में पड़ा 789.45 मेटन असुरक्षित अपशिष्ट पीथमपुर अथवा कॉमन ट्रींटमेंट सिक्योर्ड डिस्पोजल फेसिलिटी में वर्ष 2018 में हो गया है। उन्होंने बताया कि निपटान न करने के कारण दोनों उद्योगों पर एफआईआर दायर हुई है। केंद्रीय प्रदूषण नियमंत्र बोर्ड और प्रदेश प्रदूषण नियमंत्रण बोर्ड ने इसके नुकसान पर समय समय पर जांच की है। फिलहाल भारत पर्यावरण एवं वन मंत्रालय एवं केंद्रीय प्रदूषण नियत्रंण बोर्ड निपटान के लिए डीपीआर तैयार कर रहा है। विधायक गेहलोत ने बाजना बसस्टैण्ड फोरलेन निर्माण का मामला भी विधानसभा में उठाया ।
यह बात मध्यप्रदेश के लोक निर्माण मंत्री सज्जनसिंह वर्मा ने सैलाना विधायक हर्षविजय गेहलोत ‘गुड्डू’ द्वारा पूछे गए सवाल के जवाब में कही। श्री गेहलोत ने रतलाम में 20 सालों से व्याप्त रासायनिक कचरा की समस्या को लेकर अहम सवाल विधानसभा में उठाया। उन्होंने लोनि मंत्री से पूछा कि रतलाम में 20 सालों से पड़ी फैक्ट्रियों का 30 हजार टन जहरीला कचरा आज तक क्यों नहीं उठाया गया। इस लापरवाही के लिए कौन जिम्मेदार है। जल, कृषि ,मानव स्वास्थ, पशुधन, वायुमंडल, कृषि भूमि में इस कचरे के कारण क्या हानि हुई है। 20 साल में अध्य्यन कब कब इसके प्रभाव का अध्य्यन किया गया। उन्होंने यह भी पूछा कि जहरीले कचरे को छोड़ने के जिम्मेदार उद्योगों के मालिक पर क्या कार्रवाई हुई है। कचरा के निष्पादन के भूमिगत स्त्रोत ठीक करने, कृषि भूमि ठीक करने में क्या उनसे कोई वसूली हुई है। कचरे में कौन-कौन से रसायन है और बरसात में यह रसयान घुलने से क्या क्या नुकसान होते हैं। जहरीला कचरा कब तक उठेगा और भूगर्भ स्त्रोत कब तक ठीक होंगे।
उद्योगो पर हुई है एफआईआर , कचरा निष्पादन के लिए बन रही डीपीआर
इसके जवाब में मंत्री श्री वर्मा ने बताया कि रतलाम में वर्तमान में करीब बाइस हजार तीन सौ सत्राह मैट्रिक टन कचरा पड़ा हुआ है। यह कचरा परिसंकटमय अपशिष्ट है न की जहरीला कचरा। जिले के डोसीगांव में सज्जन केमिकल्स का करीब 22316.6 मैट्रिक टन और जेवीएल का करीब 0.4 मैट्रिक टन कचरा पड़ा है। सज्जन केमिकल्स के आधिपत्या के प्लांट में पड़ा 789.45 मेटन असुरक्षित अपशिष्ट पीथमपुर अथवा कॉमन ट्रींटमेंट सिक्योर्ड डिस्पोजल फेसिलिटी में वर्ष 2018 में हो गया है। उन्होंने बताया कि निपटान न करने के कारण दोनों उद्योगों पर एफआईआर दायर हुई है। केंद्रीय प्रदूषण नियमंत्र बोर्ड और प्रदेश प्रदूषण नियमंत्रण बोर्ड ने इसके नुकसान पर समय समय पर जांच की है। फिलहाल भारत पर्यावरण एवं वन मंत्रालय एवं केंद्रीय प्रदूषण नियत्रंण बोर्ड निपटान के लिए डीपीआर तैयार कर रहा है। विधायक गेहलोत ने बाजना बसस्टैण्ड फोरलेन निर्माण का मामला भी विधानसभा में उठाया ।