रतलाम(खबरबाबा. कॉम)।कहते है स्कूल में पढ़ाई के साथ ही बेहत्तर स्वास्थ्य की भी जानकारी बच्चों को दी जाती है । लेकिन अमूमन सभी सरकारी स्कूलों में तो बच्चों को गन्दगी की पाठशाला में ही पढ़ना मजबूरी होता है। हाला की इन बच्चों का स्वच्छता रैली की भीड़ का हिस्सा बना कर जिम्मेदार अपने किसी स्वार्थो की पूर्ति कर अपने हाथों से अपनी पीठ जरूर थपथापा लेते है । शहर के प्राचीन स्कूलों में से एक सूरज पोल स्कूल में इन दिनों खतपतवार की फसल और गन्दगी के बीच सरकारी स्कूल में बच्चे पढ़ने आते है और शिक्षको को नोकरी की खातिर पढ़ने आना पढ़ता है । शनिवार को जब सरकार के ” मिले बाँचे” कार्यक्रम में टीचर के रूप में महापौर को पढ़ने आना था , बस फिर क्या था जिम्मेदारों को सफाई की याद आ गई । लिहाजा महापौर के स्कूल पहुंचने से पहले महापौर डॉ सुनीता यार्दे को निगम अमला स्कूल भेजना पड़ा, और सफाई करवाना पडी । दरअसल रतलाम का शासकीय सूरजपोर माध्यमिक विद्यालय आज भी राजवाड़ा परिसर के एक मैदान के पास लगी दिवार के पास कमरों में लगता है इस स्कूल में काफी समय से मैदान में साफ सफाई नही हुई ,जिसके कारण यहां बड़ी गाजर घांस स्कूल के सामने उग गयी और मच्छरों और गन्दगी ने स्वास्थ्य पर सवाल खड़े कर रखे थे । लेकिन आज इसी स्कूल में महापौर डॉ सुनीता यार्दे को क्लास लेना थी , बस फिर क्या था महापौर ने स्कूल जाने से पहले निगम अमले को स्कूल रवाना किया और क्लास शुरू होने के पहले गाजर घास साफ करवाई, हालांकि यह महापौर की जागरूकता नही बल्कि स्कूली बच्चो की खुशकिस्मत थी कि महापौर डॉ सुनीता यार्दे को इस स्कूल में पढ़ाने आना था , वरना स्कूल में सफाई की सुध लेने लंबे समय से कोई नही आया था , काश … महापौर जी और नेत्रत्वकर्ता शहर की सड़को पर कुछ कदम चल ले तो स्मार्ट सिटी का सपना देखने वाले शहर की उत्कृष्ट सड़को पर घटिया निर्माण के गड्ढे वाले जख्म और स्वच्छता में नम्बर वन के दावों की भी हक़ीक़त से रूबरू हो जाए ….?
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