प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और जापान के प्रधानमंत्री शिंजो आबे ने आज अहमदाबाद से मुंबई के बीच चलने वाली भारत की पहली बुलेट ट्रेन के लिए आधारशिला रखी. मुंबई से अहमदाबाद के बीच चलने वाली बुलेट ट्रेन 2022 तक बनकर तैयार होगी. यह परियोजना भारतीय रेल और जापान के शिन्कान्सेन टेक्नोलॉजी की संयुक्त परियोजना है.
बुलेट ट्रेन का पहला कॉरीडोर मुंबई से अहमदाबाद के बीच तय किया गया है. मुंबई से अहमदाबाद तक करीब 508 किलोमीटर की दूरी ये बुलेट ट्रेन तय करेगी.
इसके बीच कुल 12 स्टेशन होंगे. बांद्रा कुर्ला कांप्लेक्स से शुरू होकर ये ठाणे, विरार, बोइसर, वापी, बिलीमोरा, सूरत, भरूच, आणंद, अहमदाबाद होते हुए साबरमती स्टेशन पहुंचेगी.
बुलेट ट्रेन की रफ्तार 320 किमी प्रति घंटा होगी. 508 किलोमीटर के इस सफर को तय करने में बुलेट ट्रेन को करीब तीन घंटे का वक्त लगेगा.
बुलेट ट्रेन करीब 468 किलोमीटर का सफर एलिवेटेड रोड यानी जमीन से ऊपर बने ट्रैक पर करेगी. 27 किमी का सफर अंडरग्राउंड यानी जमीन के नीचे करेगी, इसमें 7 किलोमीटर वो समंदर के नीचे का सफर भी शामिल है. करीब 13 किमी का सफर बुलेट ट्रेन जमीन पर तय करेगी.
2023 तक बुलेट ट्रेन दौड़ने लगेगी, पांच साल में करीब एक लाख 10 हजार करोड़ रूपए बुलेट ट्रेन को बनाने में खर्च होंगे.
बुलेट ट्रेन में 10 डिब्बे होंगे, जिनमें करीब साढ़े सात सौ लोग एक साथ सफर कर पाएंगे. हर दिन एक तरफ से 35 ट्रेनें चलेंगीं. रोजाना करीब 36 हजार लोग सफर कर सकेंगे. 2053 तक ये क्षमता 1 लाख 86 हजार लोगों की यात्रा की हो जाएगी. इसका किराया 2700 से 3000 रूपए तक होगा.
देश का पहला बुलेट ट्रेन प्रोजेतक्ट जापान की मदद से बनने जा रहा है. जापान इसके लिए न सिर्प टेक्नोलॉजी दे रहा है, बल्कि कुल निवेश का 80 फीसदी यानी करीब 88 हजार करोड़ रुपये कर्ज के रूप में भी दे रहा है. जापान ने इस परियोजना के लिए 0.1 प्रतिशत की न्यूनतम दर पर ऋण दिया है.
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