रतलाम,22 फरवरी(खबरबाबा.काम)। जब तक दु:खी किसान रहेगा, धरती पर तूफान रहेगा…. किसानों के आंसू सरकार को ले डूबेंगे…, ये नारे गुरुवार को सैलाना बस स्टैण्ड स्थित कृषि उपज मंडी परिसर में जमकर गूंजे। मंडी परिसर में गुरुवार को किसान एकता संघ के बैनर तले लहसुन की फसलों पर लागत के 10 प्रतिशत दाम भी नहीं मिलने के विरोध में किसानों ने जमकर प्रदर्शन किया। इस दौरान किसानों ने नाराजगी जताते हुए मंडी का गेट भी करीब एक घंटे तक बंद कर दिया और चेतावनी दी कि लहसुन फसलों का दाम सही नहीं मिला तो 15 दिनों बाद उग्र प्रदर्शन किया जाएगा। इस दौरान मुख्यमंत्री के नाम मंडी सचिव के नाम ज्ञापन भी सौंपा।
गुरुवार सुबह करीब 11 बजे कृषि उपज मंडी परिसर में किसानों ने जमकर नाराजगी जताई। प्रदेश व्यापी आंदोलन के तहत किसान एकता संघ अध्यक्ष जगदीश पाटीदार हतनारा के नेतृत्व में किसान पहुंचे और वहां मंडी परिसर में नारेबाजी की। किसानों ने बताया कि लहसुन की फसल बोने में कम से कम 20-25 हजार रुपये प्रति बीघा का खर्च आ रहा है। एक बीघा में कहीं 3 तो कहीं 5 क्विंटल लहसुन पैदा हो रही है। महीनों तक रात-दिन मेहनत करके, जब किसान लहसुन लेकर मंडी पहुंच रहे हैं तो वहां उन्हें केवल 400 रुपये प्रति क्विंटल का भाव मिल रहा है। यह लागत का 10 प्रतिशत है जो किसानों के मुंह पर तमाचे के बराबर है। किसानों ने लहसुन का समर्थन मूल्य 5000 रुपये प्रति क्विंटल करने की मांग की। साथ ही लहसुन की फसल को भावांतर योजना में शामिल कर गरीब किसानों को हो रहे नुकसान की भरपाई करवाने और किसानों के साथ हो रहे अच्याचार को रोकने की मागं की गई।
15 दिन में दाम नहीं तो मंडी बंद…
किसान एकता संघ अध्यक्ष श्री पाटीदार ने बताया कि लहसुन सहित सभी फसलों के दाम बहुत कम मिल रहे हैं। ऐसे में सरकार को 15 दिन का समय दिया जा रहा है। अगर इसके बाद भी लहसुन पर सही दाम नहीं मिला तो किसान मंडी पर उग्र आंदोलन करेंगे। इस दौरान सिर्फ सांकेतिक तौर पर करीब 1 घंटे तक मंडी का दरवाजा बंद भी रखा गया है। इसके बाद मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के नाम मंडी सचिव को ज्ञापन भी दिया।
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