रतलाम,26 अप्रैल(खबरबाबा.काम)। तप कई प्रकार का होता है। सिर्फ एकासना, उपवास करना ही तप करना नहीं है। कई अन्य प्रकार से भी तप किया जा सकता है। गलत इच्छा का नियंत्रण करना, क्रोध करने का मन हो और नहीं किया और कभी अपेक्षा टूट जाने पर प्रतिक्रिया देने से रूकना भी तपाचार है। इच्छा पर नियंत्रण श्रेष्ठ तप है। हर गलत कार्य पर नियंत्रण हमे तपस्वी बनाता है।
यह बात राज प्रतिबोधक, पद्मभूषण, सरस्वतीलब्धप्रसाद, परम पूज्य आचार्य श्रीमद्विजय रत्नसुन्दर सूरीश्वरजी महाराज ने रूद्राक्ष कालोनी (लक्ष्मी नगर,हरमाला रोड़) में प्रवचन के दौरान कही। श्री देवसुर तपागच्छ चारथुई जैन श्रीसंघ, गुजराती उपाश्रय एवं श्री ऋषभदेवजी केशरीमलजी जैन श्वेताम्बर पेढ़ी द्वारा आयोजित आठ दिवसीय आचार महिमा महोत्सव में उन्होंने लॉ..स ऑफ कंट्रोल पर प्रवचन देते हुए ज्ञानाचार, दर्शनाचार, चारित्राचार, तपाचार एवं वीर्याचार पर प्रकाश डाला।
आचार्यश्री ने कहा कि ज्ञान के प्रति बहुमान का भाव दर्शन के प्रति वात्सल्य का भाव, चारित्र के प्रति संकल्प का भाव, तप के प्रति उत्साह और वीर्याचार में पराक्रम का भाव होना चाहिए। ज्ञान के प्रति बहुमान का भाव इसलिए जरूरी है कि जिस प्रकार पानी, प्यास और भोजन, भूख मिटाता है, उसी प्रकार ज्ञान में तृप्ति, मुक्ति एवं शुद्धि निहित है। साधु संस्था यदि अमीरी महसूस करती है, तो सिर्फ ज्ञान की वजह से करती है। संसार छोडक़र संयम लेने की ताकत भी ज्ञान ही देता है। इसलिए ज्ञान के प्रति कभी निंदा, उपेक्षा आदि का भाव नहीं होना चाहिए।
उन्होंने कहा कि भगवान ने जिन्हें प्यार दिया, उनके प्रति प्यार वात्सल्य है। भगवान जगत के सारे जीवों के प्रति वात्सल्य का भाव रखने की प्रेरणा देते है। इसी प्रकार चारित्र के लिए इच्छा कुछ नहीं कर सकती, लेकिन संकल्प सबकुछ कर सकता है। क्रिकेट में जैसे बेट्समेन सिर्फ बाल को ही देखता है, वैसे ही मंदिर में जाए, तो भगवान को देखने का संकल्प रखे। धर्म क्रिया की ताकत पर कभी शंका नहीं करना चाहिए। इच्छा के बजाए संकल्प देखोगे, तो सफलता अवश्य मिलेगी।
आरंभ में लाभार्थी परिवार के लीलाबाई विजय गादिया, सुशील गादिया, भूपेंद्र कोठारी, प्रकाश भटेवरा एवं 12 माह निस्वार्थ भाव से सेवा करने वाले वैद्यराज रत्नदीप निगम का बहुमान किया गया। श्री संघ की और से अध्यक्ष सुनील ललवानी, सुशीलाबेन मेहता, मोनिका वाघमार, सरला सकलेचा, दिलीप मित्तल, अंकित ललवानी, श्रीपाल मालवीया, राजेंद्र ललवानी एवं अजीत सुराना आदि ने बहुमान किया। इस मौके पर विजय दोशी ने संगीतमय प्रस्तुतियां दी। संचालन श्री संघ के उपाध्यक्ष मुकेश जैन ने किया। प्रभावना का वितरण कमलाबाई मांगीलाल वागमार एवं जैनांनद परिवार द्वारा किया गया।
रविवार को आचार्य पदवी का भव्य कार्यक्रम
रूद्राक्ष कालोनी में 28 अप्रैल, रविवार को पंन्यास प्रवर श्री युगसुंदरविजयजी म.सा.की आचार्य पदवी के भव्य कार्यक्रम के साथ आठ दिवसीय आचार महिमा महोत्सव का समापन होगा। श्री देवसुर तपागच्छ चारथुई जैन श्रीसंघ, गुजराती उपाश्रय एवं श्री ऋषभदेवजी केशरीमलजी जैन श्वेताम्बर पेढ़ी के तत्वावधान में महोत्सव के छटे दिन दोपहर में श्री गोतमस्वामी पूजन किया गया। शाम को सामूहिक प्रतिक्रमण हुए। महोत्सव के तहत 27 अप्रैल को सुबह 9 बजे आचार्यश्री के प्रवचन होंगे। दोपहर 2.30 बजे गुजराती उपाश्रय में श्राविकाओं का कार्यक्रम एवं रात्रि 8 बजे पूर्वाचार्यों के जीवन पर केंद्रित कार्यक्रम होगा। श्रीसंघ ने धर्मावलंबियों से अधिक से अधिक उपस्थित होने का आव्हान किया है।
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