नई दिल्ली, 14अक्टूबर2019/ भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) 23 अक्टूबर को लोकतांत्रिक प्रक्रिया की ओर फिर लौटेगा तो भारतीय क्रिकेट के गौरवशाली कप्तानों में से एक सौरव गांगुली बोर्ड के अध्यक्ष की कमान संभालेंगे. सूत्रों का कहना है कि कोर्ट की ओर से नियुक्त बोर्ड के प्रशासन के तीन साल पूरे होने के बाद बोर्ड लोकतांत्रिक प्रक्रिया की ओर लौट रहा है.
फिलहाल गांगुली के लिए ये नियुक्ति थोड़ी अवधि के लिए ही होगी. नए नियमों के मुताबिक गांगुली के लिए ये नियुक्ति जुलाई 2020 तक ही होगी. गांगुली बंगाल क्रिकेट एसोसिएशन में बीते पांच साल से विभिन्न पद संभालते रहे हैं. इनमें राज्य क्रिकेट एसोसिएशन के अध्यक्ष के अलावा प्रशासक का भी पद है. नए नियमों के मुताबिक कोई व्यक्ति एक बार में छह साल तक ही पद पर रह सकता है.
रणजी ट्रॉफी पर देंगे ध्यान
बीसीसीआई की राज्य इकाइयों की अनौपचारिक बैठक में गांगुली का नाम बोर्ड अध्यक्ष के लिए फाइनल होने के बाद गांगुली ने कहा, “ऐसा नियम है तो हमें उसके हिसाब से चलना होगा. मेरी प्राथमिकता फर्स्ट क्लास क्रिकेटर्स को देखने की है. मैंने COA से आग्रह किया था लेकिन उन्होंने सुना नहीं. रणजी ट्रॉफी क्रिकेट पर फोकस रहेगा. क्रिकेटर्स के आर्थिक हितों को देखना होगा.”
गांगुली 2000 में भारतीय क्रिकेट टीम के कप्तान बने थे तो टीम इंडिया खस्ता हाल में थी. उससे पहले के दौर में मैच फिक्सिंग स्कैंडल की काली छाया से भारतीय क्रिकेट को गुज़रना पड़ा था. गांगुली ने अपनी आक्रामक कप्तानी से ना सिर्फ खिलाड़ियों का मनोबल बढ़ाया बल्कि इस विश्वास को भी पुख्ता किया कि टीम इंडिया विदेश में भी जीत हासिल कर सकती है.
गांगुली बीसीसीआई का अध्यक्ष पद संभालते हैं तो आईसीसी में उनकी बोर्ड रूम रणनीतियों पर सबकी नजरें रहेंगी. इस नई पारी में गांगुली कैसा प्रदर्शन करते हैं, दूसरे देशों के बोर्डों की भी इसमें दिलचस्पी रहेगी.
(साभार-आज तक)
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