15दिसम्बर2019/ उत्तर कोरिया ने अपने सोहे लॉन्च साइट से एक और अहम परीक्षण किया है. उत्तर कोरिया के सरकारी मीडिया ने इसकी जानकारी दी है. अमेरिका और उत्तर कोरिया के बीच एटमी समझौते को लेकर एक डेडलाइन तय है लेकिन इसके पूरे होने से पहले ही उत्तर कोरिया ने दो परीक्षण कर दिए हैं, जिसके बाद इस अहम समझौते पर गतिरोध के बादल मंडराने लगे हैं.
सोहे टेस्ट साइट पर परीक्षण की जानकारी अमेरिकी दूत स्टीफन बीगन के सियोल पहुंचने से ठीक एक दिन पहले दी गई है. बीगन तीन दिन के दौरे पर दक्षिण कोरिया की राजधानी सियोल पहुंचने वाले हैं. बीगन का यह दौरा अमेरिका के मीडियम रेंज बैलिस्टिक मिसाइल के परीक्षण के बाद शुरू हो रहा है जिसे प्रशांत महासागर में अंजाम दिया गया है. स्टीफन बीगन उत्तर कोरिया के लिए अमेरिकी दूत हैं. समाचार एजेंसी योनहाप के अनुसार, रविवार से शुरू होने वाली उनकी तीन दिवसीय यात्रा उत्तर कोरिया की ओर से किए रॉकेट इंजन परीक्षण के मद्देनजर बढ़ रहे तनाव और अमेरिका की चेतावनी के बीच हो रही है.
उत्तर कोरिया की सरकारी समाचार एजेंसी केसीएनए ने कहा, 13 दिसंबर को 22.41 से 22.48 बजे के बीच सोहे सैटेलाइट लॉन्च साइट से एक और अहम परीक्षण किया गया. केसीएनए के हवाले से उत्तर कोरिया के नेशनल एकेडमी ऑफ डिफेंस साइंस के प्रवक्ता ने कहा, इस परीक्षण से एटमी ताकत बढ़ाने में मदद मिलेगी. हालांकि इस बयान में टेस्ट के बारे में और ज्यादा जानकारी नहीं दी गई है.
उत्तर कोरिया के चीफ ऑफ जनरल स्टाफ पाक जॉन चोन ने शनिवार को कहा था कि उनका देश नए हथियार बनाने के लिए नई टेक्नोलॉजी इजाद कर रहा है. जॉन चोन ने कहा, हालिया परीक्षण से जो आंकड़े, अनुभव और तकनीक जुटाए गए हैं, उससे हमें अगली पीढ़ी के हथियार बनाने में मदद मिलेगी. बता दें, सोहे उत्तर कोरिया के उत्तर-पश्चिम तट पर बना टेस्टिंग साइट है जहां से सैटेलाइट परीक्षण किए जाते हैं लेकिन प्योंगयांग यहां से कई रॉकेट लॉन्च कर चुका है. प्योंगयांग के इस कदम की अमेरिका सहित कई देशों ने आलोचना की है और उनका मानना है कि उत्तर कोरिया सैटेलाइट के नाम पर लॉन्ग रेंज बैलिस्टिक मिसाइल का का परीक्षण कता है.
चिंताएं इस बात को लेकर बनी हुई हैं कि उत्तर कोरिया वार्ता प्रक्रिया से दूरी बना सकता है, क्योंकि साल के अंत तक निर्धारित समय सीमा (डेडलाइन) में बात नहीं बनने पर ‘नया रास्ता’ अपनाने की धमकी के साथ तनाव बढ़ता जा रहा है. अमेरिका और उत्तर कोरिया ने आखिरी बार अक्टूबर में स्वीडन में एटमी वार्ता की थी. लेकिन वार्ता में बहुत कम बात बन पाई, जिसमें उत्तर कोरिया ने अमेरिका पर ‘खाली हाथ’ वार्ता करने के लिए आने का आरोप लगाया था.
(साभार-आज तक)
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