कब सुनोगे सरकार: अवैध कॉलोनी में अनुमति देने की तैयारी,इधर वैध कॉलोनी में रह रहे हजारों लोगों को नामांतरण,लीज बढ़ाने और निर्माण अनुमति देने से इंकार, विभाजित प्लाट और मकान धारक हजारों परिवार हो रहे परेशान, सीएम की घोषणा के बाद भी आदेश नहीं हुए जारी
रतलाम,28जनवरी(खबरबाबा.काम)। रतलाम सहित प्रदेश में अन्य स्थानों पर अवैध कॉलोनियों को वैध कर उनमें निर्माण अनुमति देने एवं अन्य विकास कार्य की तैयारी की जा रही है। सरकार का यह कदम प्रशंसनीय है। इससे इन कॉलोनी में रह रहे हजारों परिवारों को राहत मिलेगी। लेकिन आश्चर्य की बात यह है कि दूसरी ओर सरकार वैध कालोनियों में रह रहे हजारों मध्यमवर्गीय परिवारों की परेशानियों को अनदेखा कर रही है। वैध कॉलोनी में हजारों परिवार ऐसे हैं जो निर्माण अनुमति, नामांतरण और लीज बढ़ाने के लिए नगर निगम के चक्कर काट रहे हैं और उन्हें इंकार मिल रहा है।
हम बात कर रहे हैं ऐसे परिवारों की जो विभाजित प्लाट पर बने मकानों में रह रहे हैं और अब न तो उनके प्लाट का नामांतरण हो रहा है, ना ही लीज बढ़ाई जा रही है और ना ही उस पर भवन निर्माण की अनुमति दी जा रही है।
हजारों परिवारों के आवास जैसी मूलभूत आवश्यकता से जुड़े विभाजित प्लाट के मुद्दे को सबसे पहले खबरबाबा.काम ने प्रमुखता से उठाया। इसके बाद शहर विधायक चेतन्य काश्यप ने मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को विभाजित प्लाट की लीज वृद्धि, नामांतरण और भवन निर्माण की अनुमति नहीं मिलने से परेशान हो रहे हजारों परिवार की समस्या से अवगत कराया। विधायक श्री काश्यप के प्रयास के बाद नगर निगम चुनाव के दौरान रतलाम में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने सभा में विभाजित प्लाट के मामले के निराकरण की घोषणा की थी। मुख्यमंत्री की घोषणा के इतने दिन बाद भी नगरीय प्रशासन मंत्रालय ने मामले के निराकरण को लेकर कोई ठोस कदम नहीं उठाया है।
नगर निगम चुनाव के बाद शहर विधायक चेतन्य काश्यप दो बार भोपाल जाकर नगरीय प्रशासन मंत्री भूपेंद्र सिंह से मिलकर अविकसित कालोनियों और विभाजित प्लाट के मामले के शीघ्र निराकरण की मांग भी कर चुके हैं। पूर्व महापौर शैलेंद्र डागा भी मुख्यमंत्री को इस समस्या के समाधान के लिए पत्र लिख चुके हैं।
विभाजित प्लाट पर लीज वृद्धि, नामांतरण और भवन निर्माण अनुमति नहीं मिलने के कारण शहर में हजारों परिवार परेशान है। विधायक चेतन्य काश्यप के प्रयास से मुख्यमंत्री द्वारा की गई घोषणा के बाद इन हजारों मध्यमवर्गीय परिवारों में एक उम्मीद की किरण जागी थी, लेकिन अभी तक मामले का निराकरण नहीं होने से सभी निराश है।
शहर में अवैध कालोनियों को वैध करने की प्रक्रिया तेजी से चल रही है। संभावना है कि फरवरी से अवैध कालोनियों में निर्माण अनुमति भी देना शुरू कर दी जाएगी। ऐसे में सभी को आवास उपलब्ध कराने का वादा करने वाली सरकार विभाजित प्लाट पर बने मकानों में रह रहे हजारो मध्यमवर्गीय परिवार के आवास से जुड़े इस महत्वपूर्ण मुद्दे का मुख्यमंत्री की घोषणा के बाद भी समाधान क्यों नहीं कर पा रही है ,यह समझ से परे है।